Accident Reduction : कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की सड़कों पर वर्षों से जारी मौत का सिलसिला अब रुकता हुआ दिख रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में जिले में सड़क दुर्घटनाओं में 35 प्रतिशत से अधिक की बड़ी कमी दर्ज की गई है। पुलिस प्रशासन और सरकार की 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' योजना के ऐसे अप्रत्याशितऔर सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसने सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में हलचल मचा दी है। मौतों की संख्या घटाने के मामले में यह जिला पूरे राज्य में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। 9 थानों और 2 खतरनाक कॉरिडोर में बना सुरक्षा चक्रव्यूह पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि यह गुप्त मिशन नवंबर 2025 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय, सेफ लाइफ फाउंडेशन और यूपी पुलिस के सहयोग से शुरू हुआ था। जांच में पाया गया कि जिले के 9 थानों और दो अत्यधिक खतरनाक रास्तों (क्रिटिकल कॉरिडोर) पर 54 प्रतिशत मौतें हो रही थीं। इन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष टीमों को सड़कों पर भेजा गया, जिन्हें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर और बॉडी वार्न कैमरों जैसे उन्नत उपकरणों से लैस किया गया था। 86 हजार+ चालान, अवैध कट बंद नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच पुलिस की इन टीमों ने सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ने वाले वाहनों पर चौतरफा कार्रवाई की। इस दौरान कुल 86,902 चालान बनाए गए, जिसमें ओवरस्पीडिंग के 13,798, शराब पीकर गाड़ी चलाने के 4,109 और गलत दिशा में ड्राइविंग के 16,682 चालान शामिल हैं। इसके साथ ही हादसों को रोकने वाले अवैध कटों को बंद किया गया और डिवाइडर तथा रिफ्लेक्टर लगाए गए। इस चक्रव्यूह का प्रभाव यह हुआ कि 15 में से 7 सबसे संकटग्रस्त जाम वाले स्थान हमेशा के लिए समाप्त हो गए। बेहतर कामकाज के बाद 9 में से 5 थानों को इस सूची से हटा दिया गया है, जबकि बिसरख, बादलपुर, दादरी और दनकौर में अभी भी यह कठोर निगरानी जारी है। वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में घायलों की संख्या में 45.57 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी देखी गई है। ये भी पढ़े : लर्नर लाइसेंस के लिए परिवहन विभाग जाना जरूरत नहीं! परीक्षा भी होगी ऑनलाइन, जाने पूरी प्रक्रिया